Thermodynamics in Hindi | ऊष्मागतिकी क्या है, परिभाषा, प्रकार

Hello Friends आपका स्वागत है हमारे ब्लॉग Examenglishhindi.Com में आज के इस Article में हम पढ़ेंगे की Thermodynamics in Hindi | ऊष्मागतिकी क्या है, परिभाषा, प्रकार, ऊष्मागतिकी क्या है? (What is Thermodynamics in Hindi), तंत्र के प्रकार (Type of System), तंत्र के आकार (Mechanism Size)

ऊष्मागतिकी का शून्यक नियम(Zeroth Law of Thermodynimics), ऊष्मागतिकी का प्रथम नियम क्या है? (What is the First Law of Thermodynamics in Hindi), ऊष्मागतिकी का दूसरा नियम (Second Law Of Thermodynamics in Hindi), उष्मागतिकी का तीसरा नियम(Third Law of Thermodynamics in Hindi) तो चलिए शुरू करते है – Thermodynamics in Hindi

ऊष्मागतिकी क्या है? (What is Thermodynamics in Hindi)

ऊष्मागतिकी :- रसायन विज्ञान की वह शाखा जिसके अंतर्गत ऊष्मा के परिवर्तन का या ऊष्मा(heat) के प्रवाह(flow) का अध्ययन (studied) किया जाता है। अर्थात chemical reaction होने के समय उष्मा के परिवर्तन का अध्ययन किया जाता है। ऊष्मा गतिकी कहलाती है।

  • ऊष्मा परिवर्तन करने पर होने वाले रासायनिक परिवर्तन को ऊष्मागतिकी कहते हैं।
  • ऊष्मा का प्रवाह एक पिंड(body) से दूसरे पिंड में हो सकता है।
  • ऊष्मा का प्रवाह पिंड से वातावरण में हो सकता है।
  • ऊष्मा का प्रवाह वातावरण से पिंड की ओर हो सकता है।

रासायनिक ऊष्मागतिकी में प्रयुक्त होने वाले निम्न परिभाषाएं :-

तंत्र या निकाय (System) :- ऊष्मा गतिकी अध्ययन के लिए जिस वस्तु या भाग का चुनाव किया जाता है। वह तंत्र या निकाय (System) कहलाता है।

इस तंत्र (System) पर ताप दाब या अन्य कारकों के प्रभाव का ऊष्मागतिकी अध्ययन किया जाए तो वह भाग तंत्र या निकाय (System) कहलाता है।

परिवेश :- ऊष्मागतिकी अध्ययन में प्रयुक्त होने वाले भाग को छोड़कर शेष बचा हुआ संपूर्ण भाग परिवेश कहलाता है।

तंत्र के प्रकार (Type of System)

तंत्र तीन प्रकार के होते हैं जो निम्नलिखित है।

1. खुला तंत्र (Open System)
2. बंद तंत्र (Closed System)
3. विलगित तंत्र (Isolated System)

1. खुला तंत्र (Open System) :- ऐसा तंत्र जिसमें निकाय तथा परिवेश (Entity and Environment) के बीच पदार्थ तथा ऊष्मा का आदान-प्रदान हो सकता है खुला तंत्र कहलाता है। जैसे – खुले बिकर में जल का उबालना।
निकाय तथा परिवेश

2. बंद तंत्र (Closed System) :- ऐसा तंत्र जिसमें निकाय तथा परिवेश (Entity and Environment) के बीच ऊष्मा का तो आदान-प्रदान हो सके लेकिन पदार्थ का आदान-प्रदान नहीं होता है। बंद तंत्र कहलाता है। जैसे- किसी बंद बीकर में अभिक्रिया का होना।

3. विलगित तंत्र (Isolated System) :- ऐसा तंत्र जिसमें निकाय तथा परिवेश (Entity and Environment) के बीच ऊष्मा तथा पदार्थ दोनों का ही आदान-प्रदान न हो सके विलगित तंत्र कहलाता है। जैसे – ऊष्मा धारिता, आंतरिक ऊर्जा आदि।

तंत्र के आकार (Mechanism Size)

तंत्र के निम्न दो आकार हैं जो निम्नलिखित है।

1. सूक्ष्म तंत्र (Micro System)
2. स्थूल तंत्र (Macro System)

1. सूक्ष्म तंत्र (Micro System)

  • ऐसा तंत्र जिनमें केवल एक ही अणु या परमाणु (Molecule or Atom) हो उसे सूक्ष्म तंत्र (Micro System) कहते हैं।
  • इस प्रकार के तंत्र का ऊष्मागतिकी (Thermodynamics) अध्ययन संभव नहीं है।

2. स्थूल तंत्र (Macro System)

  • ऐसा तंत्र जिनमें बहुत सारे अणु तथा परमाणु (Molecules and Atoms) उपस्थित होते हैं उसे सूक्ष्म अणु (Micromolecule) कहते है।
  • इसका ऊष्मा गतिकी (Thermodynamics) अध्ययन संभव है।

तंत्र के गुण (Properties Of The System)

तंत्र के निम्न दो गुण है जो निम्नलिखित है।

1. विस्तीर्न गुण (Extensive Properties)
2. गहन गुण (Deep Properties)

1. विस्तीर्न गुण (Extensive Properties) :- System के वे गुण जो उसमें उपस्थित पदार्थ की मात्रा तथा उसके परिणाम पर निर्भर करती है। विस्तीर्न (Extensive) कहलाता है। जैसे – आयतन द्रव्यमान इत्यादि पर निर्भर करता है।

2. गहन गुण (Deep Properties) :– तन्त्र के वे गुण जो उसमें उपस्थित पदार्थ की मात्रा पर निर्भर नहीं करते हैं बल्कि पदार्थ की प्रकृति पर निर्भर करते हैं। जैसे – दाब, ताप इत्यादि।

ऊष्मागतिकी का शून्यक नियम(Zeroth Law of Thermodynimics)

शून्यक नियम पहले दूसरे और तीसरे नियम के बाद ही खोजा गया था।लेकिन शून्यक नियम इन तीनो नियमो का आधार है इसी कारण इसे चौथा नियम ना कह कर शून्यक नियम कहा गया है।

इसके अनुसार ऊष्मा या ताप की गति हमेशा उच्च से निम्न ताप की तरफ प्रवाहित होती है इसे हम उष्मीय सम्यवस्था भी कह सकते है।

ऊष्मागतिकी का प्रथम नियम क्या है? (What is the First Law of Thermodynamics in Hindi)

पहला नियम (First Law):-

Law of Conservation of Energy (ऊर्जा का संरक्षण) का एक अनुकूलन है। Law of Conservation कहता है कि किसी Isolated System की ऊर्जा कभी बदलती नहीं। वह हमेशा उतनी ही रहती है।

इसे ऊर्जा संरक्षण का नियम भी कहा जाता है।इसके अनुसार ऊर्जा को ना तो बनाया जा सकता है और न ही इसे नष्ट किया जा सकता है।लेकिन इसे एक माध्यम से दूसरे माध्यम में परिवर्तित किया जा सकता है।

यदि U इंटरनल एनर्जी ( आंतरिक ऊर्जा ) है, W सिस्टम द्वारा किआ हुआ काम ( वर्क डन ) है और Q सिस्टम में संग्रहित ऊष्मा, तब

उदाहरण:कोयले का इंजन (कोयले का उष्मीय ऊर्जा से यांत्रिक ऊर्जा में परिवर्तित होना)

पहले नियम का सूत्र:

[∆Q=∆U+W]

  • Q=दी गयी ऊष्मीय ऊर्जा।
  • U=आंतरिक ऊर्जा में वृद्धि।
  • W=किया गया कार्य।
  • अगर पिंड से उष्मीय ऊर्जा Q ली जाये तो कार्य धनात्मक(Positive) होगा।
  • अगर पिंड खुद उष्मीय ऊर्जा ले तो कार्य ऋणात्मक(Negative) होगा।

ऊष्मागतिकी का दूसरा नियम (Second Law Of Thermodynamics in Hindi)

दूसरा नियम ऊर्जा संरक्षण के नियम पर जोर देता है जो यह कहता है कि ऊष्मा गर्म माध्यम से ठंडे माध्यम की तरफ प्रवाहित होती है पर वो यह स्पष्ट नही कर पाया की ऊष्मा ठंडे माध्यम से गर्म माध्यम की ओर प्रवाहित क्यों नही हो पाती।

उष्मागतिकी के दूसरे नियम के दो कथन है:

केल्विन प्लांक का कथन (Kelvin Planck’s Statment)

कि इस कथन के अनुसार कोई भी ऐसा ऊष्मा इंजन बनाना संभव नहीं है। जिसमें कार्यकारी पदार्थ द्वारा उच्च ताप पर अवशोषित ऊष्मा को संपूर्ण रूप से कार्य में परिवर्तित कर दे।

क्लाउसिस का कथन(Clausis Statment )

इस कथन के अनुसार है कार्यकारी पदार्थ निम्न ताप वाली वस्तु से ऊष्मा लेकर उच्च ताप वाली वस्तु की ओर ऊष्मा का स्थानांतरण संभव नहीं है। जब तक कि कार्यकारी पदार्थ पर बाह्य कार्य संभव ना हो।

dU = 0

ऊष्मागतिकी के प्रथम नियम से

  • dQ = dU+PdV
  • dQ = PdV = dW

अतः चक्रीय प्रक्रम में अवशोषित संपूर्ण ऊष्मा निकाय के द्वारा किए गए कार्य के बराबर होती है।

उष्मागतिकी का तीसरा नियम(Third Law of Thermodynamics in Hindi)

ऊष्मागतिकी के तीसरे नियम के अनुसार एक पूर्ण क्रिस्टल(perfect crystal) की एंट्रोपी(entropy)पूर्ण शुन्य तापमान पर 0 होती है।

एन्ट्रापी(Entropy)-

  • उस ऊर्जा का परिमाण जो यांत्रिक ऊर्जा में परिवर्तित नहीं हो सकती ।

पूर्ण शुन्य तापमान(Aboslute Zero Temprature)-

  • तापमान -273.15 जहा पर अणुओं की गतिविधि बेहद कम और धीरे हो।

पूर्ण क्रिस्टल(Perfect Crystal)-

  • वह क्रिस्टल जिसमे सभी अणु एक जैसी आकृति,आकार,आयाम के हो और उनके बीच गतिविधि भी बेहद कम हो।
  • nth=Benifit/Cost
  • nth=उष्मीय दक्षता(Therml Efficiency)

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Thermodynamics in Hindi :- अगर आपने Thermodynamics in Hindi को यहाँ तक पढ़ा है तो मुझे पूरी तरह उम्मीद है की आपको Thermodynamics in Hindi अच्छी तरह से समझ में आ गया होगा| इस Artical में अगर आपको कोई भी Problem हो तो हमें Comment के माध्यम से पूछ सकते है | अगर आपको यह Artical अच्छा लगा तो अपने दोस्तों के साथ शेयर करे Thermodynamics in Hindi

Thermodynamics in Hindi FAQ

उष्मागतिकी की परिभाषा ( Definition of Thermodynamics)

वह शाखा जो एक रूप से दूसरे तक ऊर्जा की गति से संबंधित है और ऊर्जा और काम के साथ गर्मी और तापमान के बीच संबंध को थर्मोडायनामिक्स कहा जाता है।

ऊष्मागतिकी के कितने नियम हैं?

ऊष्मागतिकी का अधिक भाग दो नियमों पर आधारित है।

ऊष्मागतिकी की सीमाएं क्या है?

ऊष्मागतिकी की सीमाएं ऊष्मागतिकी के नियम सम्पूर्ण सिस्टम पर एक साथ लागू होते हैं। इन्हों अलग-अलग कणों (तापमान, दाब आदि) पर लागू नही किया जा सकता है।

ऊष्मागतिकी का द्वितीय नियम क्या है व्याख्या कीजिए?

इस नियम के अनुसार, किसी भी स्वतः चलित मशीन जिससे कोई भी बाह्य स्रोत की सहायता के, ऊष्मा को किसी ठंडी वस्तु से गर्म वस्तु अथवा नीचे ताप वाली वस्तु से ऊंचे ताप वाली वस्तु को देना असम्भव है।

कौन सा ऊष्मागतिकी फलन है?

उष्मागतिकी फलन या अवस्था फलन तथा पथ फलन कहलाते है। वे अवस्था चर जिनके मान उस पथ पर निर्भर करते है जिस से तंत्र अपनी प्रारंभिक अवस्था से अंतिम अवस्था में आता है , पथ फलन कहलाता है। आंतरिक ऊर्जा : आन्तरिक रूप से निहित पदार्थ की समस्त उर्जा को आंतरिक ऊर्जा कहते है।

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